सोइ रावन कहुँ बनी सहाई
सोइ रावन कहुँ बनी सहाई
चौपाई १, दोहा ३८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ रावन कहुँ बनी सहाई। अस्तुति करहिं सुनाइ सुनाई॥ अवसर जानि बिभीषनु आवा। भ्राता चरन सीसु तेहिं नावा॥ १ ॥
अर्थ
रावण के लिए भी वही सहायता (संयोग) आ बनी है। मन्त्री उसे सुना-सुनाकर स्तुति करते हैं। [इसी समय] अवसर जानकर विभीषणजी आये। उन्होंने बड़े भाई के चरणों में सिर नवाया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।
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विभीषण की रावण को सलाह