सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय
सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय
दोहा ३७ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥ ३७ ॥
अर्थ
मन्त्री, वैद्य और गुरु, ये तीन यदि [अप्रसन्नता के] भय या [लाभ की] आशा से [हित की बात न कहकर] प्रिय बोलते हैं (ठकुरसुहाती कहने लगते हैं ); तो [क्रमशः] राज्य, शरीर और धर्म— इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का दोहा ३७ है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी-रावण संवाद