सोइ बिजई बिनई गुन सागर
सोइ बिजई बिनई गुन सागर
चौपाई २, दोहा ३० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ बिजई बिनई गुन सागर। तासु सुजसु त्रैलोक उजागर॥ प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू। जन्म हमार सुफल भा आजू॥ २ ॥
अर्थ
वही विजयी है, वही विनयी है और वही गुणों का समुद्र बन जाता है। उसी का सुन्दर यश तीनों लोकों में प्रकाशित होता है। प्रभु की कृपा से सब कार्य हुआ। आज हमारा जन्म सफल हो गया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश