जामवंत कह सुनु रघुराया
जामवंत कह सुनु रघुराया
चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया॥ ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर। सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर॥ १ ॥
अर्थ
जाम्बवान ने कहा-हे रघुनाथजी! सुनिये। हे नाथ! जिस पर आप दया करते हैं, उसे सदा कल्याण और निरन्तर कुशल है। देवता, मनुष्य और मुनि सभी उस पर प्रसन्न रहते हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश