सो सब तव प्रताप रघुराई

चौपाई ५, दोहा ३३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई॥ ५ ॥

अर्थ

यह सब तो हे श्रीरघुनाथजी! आप ही का प्रताप है। हे नाथ! इसमें मेरी प्रभुता (बड़ाई) कुछ भी नहीं है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश