साखामृग कै बड़ि मनुसाई
साखामृग कै बड़ि मनुसाई
चौपाई ४, दोहा ३३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
साखामृग कै बड़ि मनुसाई। साखा तें साखा पर जाई॥ नाघि सिंधु हाटकपुर जारा। निसिचर गन बधि बिपिन उजारा॥ ४ ॥
अर्थ
बंदर का बस, यही बड़ा पुरुषार्थ है कि वह एक डाल से दूसरी डाल पर चला जाता है। मैंने जो समुद्र लाँघकर सोने का नगर जलाया और राक्षसगण को मारकर अशोकवन को उजाड़ डाला,।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।
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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश