सखा कही तुम्ह नीकि उपाई
सखा कही तुम्ह नीकि उपाई
चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सखा कही तुम्ह नीकि उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई॥ मंत्र न यह लछिमन मन भावा। राम बचन सुनि अति दुख पावा॥ १ ॥
अर्थ
[ श्रीरामजी ने कहा--] हे सखा! तुमने अच्छा उपाय बताया। यही किया जाय, यदि दैव सहायक हों। यह सलाह लक्ष्मणजी के मन को अच्छी नहीं लगी। श्रीरामजी के वचन सुनकर तो उन्होंने बहुत ही दुःख पाया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र