प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय
प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय
दोहा ५० · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय बिचारि। बिनु प्रयास सागर तरिहि सकल भालु कपि धारि॥ ५० ॥
अर्थ
हे प्रभु! समुद्र आपके कुलगुरु हैं, वे विचारकर उपाय बतला देंगे। तब रीछ और वानरों की सारी सेना बिना ही परिश्रम के समुद्र के पार उतर जायगी।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का दोहा ५० है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र