सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई

चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई॥ मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई। रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई॥ ३ ॥

अर्थ

स्वाभाविक ही डरपोक विभीषण के वचन को प्रमाण करके उन्होंने समुद्र से मचलना (बालहठ) ठाना है। अरे मूर्ख! झूठी बड़ाई क्या करता है! बस, मैंने शत्रु (राम) के बल और बुद्धि की थाह पा ली।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

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शुक की रावण को चेतावनी