सचिव सभीत बिभीषन जाकें
सचिव सभीत बिभीषन जाकें
चौपाई ४, दोहा ५६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सचिव सभीत बिभीषन जाकें। बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें॥ सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी। समय बिचारि पत्रिका काढ़ी॥ ४ ॥
अर्थ
जिसके विभीषण-जैसा डरपोक मन्त्री हो, उसे जगत में विजय और विभूति (ऐश्वर्य) कहाँ! दुष्ट रावण के वचन सुनकर दूत को क्रोध बढ़ आया। उसने मौका समझकर पत्रिका निकाली।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी