रामानुज दीन्ही यह पाती
रामानुज दीन्ही यह पाती
चौपाई ५, दोहा ५६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
रामानुज दीन्ही यह पाती। नाथ बचाइ जुड़ावहु छाती॥ बिहसि बाम कर लीन्ही रावन। सचिव बोलि सठ लाग बचावन॥ ५ ॥
अर्थ
[और कहा--] श्रीरामजी के छोटे भाई लक्ष्मण ने यह पत्रिका दी है। हे नाथ! इसे बचवाकर छाती ठंडी कीजिये। रावण ने हँसकर उसे बायें हाथ से लिया और मन्त्री को बुलवाकर वह मूर्ख उसे बँचाने लगा।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी