जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं
जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं
चौपाई ५, दोहा ३७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं। नर बानर केहि लेखे माहीं॥ ५ ॥
अर्थ
आपने देवताओं और राक्षसों को जीत लिया, तब तो कुछ श्रम ही नहीं हुआ। फिर मनुष्य और वानर किस गिनती में हैं ?
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।
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मंदोदरी-रावण संवाद