रावन क्रोध अनल निज स्वास समीर

दोहा ४९ (क) · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

रावन क्रोध अनल निज स्वास समीर प्रचंड। जरत बिभीषनु राखेउ दीन्हेउ राजु अखंड॥ ४९ (क) ॥

अर्थ

श्रीरामजी ने रावण के क्रोधरूपी अग्नि में, जो अपनी (विभीषण की) श्वासरूपी पवन से प्रचण्ड हो रही थी, जलते हुए विभीषण को बचा लिया और उसे अखण्ड राज्य दिया।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का दोहा ४९ (क) है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।

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विभीषण की राम शरण