जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ
जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ
दोहा ४९ (ख) · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ। सोइ संपदा बिभीषनहि सकुचि दीन्हि रघुनाथ॥ ४९ (ख) ॥
अर्थ
शिवजी ने जो सम्पत्ति रावण को दसों सिरों की बलि देने पर दी थी, वही सम्पत्ति श्रीरघुनाथजी ने विभीषण को बहुत सकुचते हुए दी।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का दोहा ४९ (ख) है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण