रावन जबहिं बिभीषन त्यागा
रावन जबहिं बिभीषन त्यागा
चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
रावन जबहिं बिभीषन त्यागा। भयउ बिभव बिनु तबहिं अभागा॥ चलेउ हरषि रघुनायक पाहीं। करत मनोरथ बहु मन माहीं॥ २ ॥
अर्थ
रावण ने जिस क्षण विभीषण को त्यागा, उसी क्षण वह अभागा वैभव (ऐश्वर्य) से हीन हो गया। विभीषणजी हर्षित होकर मन में अनेकों मनोरथ करते हुए श्रीरघुनाथजी के पास चले।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण