देखिहउँ जाइ चरन जलजाता
देखिहउँ जाइ चरन जलजाता
चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
देखिहउँ जाइ चरन जलजाता। अरुन मृदुल सेवक सुखदाता॥ जे पद परसि तरी रिषिनारी। दंडक कानन पावनकारी॥ ३ ॥
अर्थ
[वे सोचते जाते थे--] मैं जाकर भगवान् के कोमल और लाल वर्ण के सुन्दर चरणकमलों के दर्शन करूँगा, जो सेवकों को सुख देनेवाले हैं, जिन चरणों का स्पर्श पाकर ऋषिनारी तर गयीं और जो दण्डकवन को पवित्र करनेवाले हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण