अस कहि चला बिभीषनु जबहीं
अस कहि चला बिभीषनु जबहीं
चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयूहीन भए सब तबहीं॥ साधु अवग्या तुरत भवानी। कर कल्यान अखिल कै हानी॥ १ ॥
अर्थ
ऐसा कहकर विभीषणजी ज्यों ही चले, त्यों ही सब राक्षस आयुहीन हो गये (उनकी मृत्यु निश्चित हो गयी)। [शिवजी कहते हैं--] हे भवानी! साधु का अपमान तुरंत ही सम्पूर्ण कल्याण की हानि (नाश) कर देता है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की राम शरण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण के लंका त्यागकर श्रीराम की शरण में आने और प्रभु द्वारा कृपापूर्वक स्वीकार किए जाने का वर्णन है।
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विभीषण की राम शरण