रावन दूत हमहि सुनि काना

चौपाई २, दोहा ५४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हे दुख नाना॥ श्रवन नासिका काटैं लागे। राम सपथ दीन्हें हम त्यागे॥ २ ॥

अर्थ

हम रावण के दूत हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिये, यहाँ तक कि वे हमारे नाक-कान काटने लगे। श्रीरामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शुक की रावण को चेतावनी