पूँछिहु नाथ राम कटकाई
पूँछिहु नाथ राम कटकाई
चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
पूँछिहु नाथ राम कटकाई। बदन कोटि सत बरनि न जाई॥ नाना बरन भालु कपि धारी। बिकटानन बिसाल भयकारी॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! आपने श्रीरामजी की सेना पूछी; सो वह तो सौ करोड़ मुखों से भी वर्णन नहीं की जा सकती। अनेकों रंगों के भालु और वानरों की सेना है, जो भयंकर मुखवाले, विशाल शरीरवाले और भयानक हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी