नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें
चौपाई १, दोहा ५४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें॥ मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा। जातहिं राम तिलक तेहि सारा॥ १ ॥
अर्थ
[दूत ने कहा--] हे नाथ! आपने जैसे कृपा करके पूछा है, वैसे ही क्रोध छोड़कर मेरा कहना मानिए (मेरी बात पर विश्वास कीजिए)। जब आपका छोटा भाई श्रीरामजी से जाकर मिला, तब उसके पहुँचते ही श्रीरामजी ने उसको राजतिलक कर दिया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी