बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि

दोहा ५६ (क) · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस। राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस॥ ५६ (क) ॥

अर्थ

[पत्रिका में लिखा था--] अरे मूर्ख! केवल बातों से ही मन को रिझाकर अपने कुल को नष्ट-भ्रष्ट न कर! श्रीरामजी से विरोध करके तू विष्णु, ब्रह्मा और महेश की शरण जाने पर भी नहीं बचेगा।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का दोहा ५६ (क) है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।

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शुक की रावण को चेतावनी