राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा
चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा॥ एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी॥ २ ॥
अर्थ
उन्होंने राम-राम का स्मरण किया। हनुमानजी ने उन्हें सज्जन जाना और हृदय में हर्षित हुए। [हनुमानजी ने विचार किया कि] इनसे हठ करके मैं परिचय करूँगा, क्योंकि साधु से कार्य की हानि नहीं होती [प्रत्युत लाभ ही होता है]।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।
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लंकिनी वध और लंका प्रवेश