बिप्र रूप धरि बचन सुनाए
बिप्र रूप धरि बचन सुनाए
चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
बिप्र रूप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषन उठि तहँ आए॥ करि प्रनाम पूँछी कुसलाई। बिप्र कहहु निज कथा बुझाई॥ ३ ॥
अर्थ
ब्राह्मण का रूप धरकर हनुमानजी ने उन्हें वचन सुनाये। सुनते ही विभीषणजी उठकर वहाँ आये। प्रणाम करके कुशल पूछी [और कहा कि] हे ब्राह्मणदेव! अपनी कथा समझाकर कहिये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-विभीषण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लंका में हनुमानजी और विभीषण की भेंट तथा राम-भक्ति से पूर्ण संवाद का वर्णन है।
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हनुमान-विभीषण संवाद