लंका निसिचर निकर निवासा

चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

लंका निसिचर निकर निवासा। इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा॥ मन महुँ तरक करैं कपि लागा। तेहीं समय बिभीषनु जागा॥ १ ॥

अर्थ

लंका राक्षसों के समूह का निवासस्थान है। यहाँ सज्जन का निवास कहाँ? हनुमानजी मन में इस प्रकार तर्क करने लगे। उसी समय विभीषणजी जागे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।

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लंकिनी वध और लंका प्रवेश