पुर रखवारे देखि बहु कपि मन
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन
दोहा ३ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार। अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार॥ ३ ॥
अर्थ
नगर के बहुत-से रखवालों को देखकर हनुमानजी ने मन में विचार किया कि अत्यन्त छोटा रूप धारण करूँ और रात के समय नगर में प्रवेश करूँ।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का दोहा ३ है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।
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लंकिनी वध और लंका प्रवेश