पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा

चौपाई ४, दोहा १८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा। चला संग लै सुभट अपारा॥ आवत देखि बिटप गहि तर्जा। ताहि निपाति महाधुनि गर्जा॥ ४ ॥

अर्थ

फिर रावण ने अक्षयकुमार को भेजा। वह असंख्य श्रेष्ठ योद्धाओं को साथ लेकर चला। उसे आते देखकर हनुमानजी ने एक वृक्ष [हाथ में] लेकर ललकारा और उसे मारकर महाध्वनि से गर्जना की।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।

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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना