जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा
जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा
चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा। सकल कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा॥ अमित नाम भट कठिन कराला। अमित नाग बल बिपुल बिसाला॥ ४ ॥
अर्थ
जिसने नगर को जलाया और आपके पुत्र को मारा, उसका बल तो सब वानरों में थोड़ा है। असंख्य नामों वाले बड़े ही कठोर और भयंकर योद्धा हैं। उनमें असंख्य हाथियों का बल है और वे बड़े ही विशाल हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक की रावण को चेतावनी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शुक द्वारा रावण को राम की सेना की शक्ति बताना और लक्ष्मणजी की अंतिम चेतावनी का पत्र देना का वर्णन है।
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शुक की रावण को चेतावनी