निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं
चौपाई ५, दोहा २५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं। भईं सभीत निसाचर नारीं॥ ५ ॥
अर्थ
बन्धन से निकलकर वे सोने की अटारियों पर जा चढ़े। उनको देखकर राक्षसों की स्त्रियाँ भयभीत हो गयीं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।
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लंका दहन