बाजहिं ढोल देहिं सब तारी
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी
चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी। नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी॥ पावक जरत देखि हनुमंता। भयउ परम लघुरूप तुरंता॥ ४ ॥
अर्थ
ढोल बजते हैं, सब लोग तालियाँ पीटते हैं। हनुमानजी को नगर में फिराकर, फिर पूँछ में आग लगा दी। अग्नि को जलते हुए देखकर हनुमानजी तुरंत ही बहुत छोटे रूप में हो गये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंका दहन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा पूँछ की अग्नि से समस्त लंका दहन का वर्णन है।
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लंका दहन