की भइ भेंट कि फिरि गए

दोहा ५३ · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर। कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर॥ ५३ ॥

अर्थ

उनसे तेरी भेंट हुई या वे कानों से मेरा सुयश सुनकर ही लौट गये? शत्रु-सेना का तेज और बल बताता क्यों नहीं? तेरा चित्त बहुत ही चकित (भौंचक्का-सा) हो रहा है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का दोहा ५३ है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।

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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र