नाना तरु फल फूल सुहाए
नाना तरु फल फूल सुहाए
चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए॥ सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें॥ ४ ॥
अर्थ
अनेकों प्रकार के वृक्ष फल-फूल से सुशोभित हैं। पक्षियों और पशुओं के समूह को देखकर वे मन में [बहुत ही] प्रसन्न हुए। सामने एक विशाल पर्वत देखकर हनुमानजी भय त्यागकर उस पर दौड़कर चढ़े।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।
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लंकिनी वध और लंका प्रवेश