ताहि मारि मारुतसुत बीरा

चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा॥ तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा॥ ३ ॥

अर्थ

पवनपुत्र धीरबुद्धि वीर श्रीहनुमानजी उसे मारकर समुद्र के पार गये। वहाँ जाकर उन्होंने वन की शोभा देखी। मधु (पुष्परस) के लोभ से भौरे गूँज रहे थे।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।

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हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा