मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि
दोहा ३९ (ख) · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात। तुरत सो मैं प्रभुसन कही पाइ सुअवसरु तात॥ ३९ (ख) ॥
अर्थ
मुनि पुलस्त्यजी ने अपने शिष्य के हाथ यह बात कहला भेजी है। हे तात! सुन्दर अवसर पाकर मैंने तुरंत ही वह बात प्रभु (आप) से कह दी।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का दोहा ३९ (ख) है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।
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विभीषण की रावण को सलाह