माल्यवंत अति सचिव सयाना

चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

माल्यवंत अति सचिव सयाना। तासु बचन सुनि अति सुख माना॥ तात अनुज तव नीति बिभूषन। सो उर धरहु जो कहत बिभीषन॥ १ ॥

अर्थ

माल्यवान् नाम का एक बहुत ही बुद्धिमान् मन्त्री था। उसने उन (विभीषण) के वचन सुनकर बहुत सुख माना [और कहा--] हे तात! आपके छोटे भाई नीति को भूषणरूप में धारण करनेवाले अर्थात्‌ नीतिमान् हैं। विभीषण जो कुछ कह रहे हैं उसे हृदय में धारण कर लीजिये।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।

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विभीषण की रावण को सलाह