मारे निसिचर केहिं अपराधा
मारे निसिचर केहिं अपराधा
चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
मारे निसिचर केहिं अपराधा। कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा॥ सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया। पाइ जासु बल बिरचति माया॥ २ ॥
अर्थ
तूने किस अपराध से राक्षसों को मारा? रे मूर्ख! बता, क्या तुझे प्राण जाने का भय नहीं है? [हनुमानजी ने कहा--] हे रावण! सुन; जिनके बल पाकर माया सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के समूहों की रचना करती है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद