जाकें बल बिरंचि हरि ईसा

चौपाई ३, दोहा २१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जाकें बल बिरंचि हरि ईसा। पालत सृजत हरत दससीसा॥ जा बल सीस धरत सहसानन। अंडकोस समेत गिरि कानन॥ ३ ॥

अर्थ

जिनके बल से हे दशशीश! ब्रह्मा, विष्णु, महेश (क्रमशः) सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं; जिनके बल से सहस्रमुख (फणों) वाले शेषजी पर्वत और वन सहित समस्त ब्रह्माण्ड को सिर पर धारण करते हैं।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।

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हनुमान-रावण संवाद