कह लंकेस कवन तैं कीसा
कह लंकेस कवन तैं कीसा
चौपाई १, दोहा २१ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहि कें बल घालेहि बन खीसा॥ की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही। देखउँ अति असंक सठ तोही॥ १ ॥
अर्थ
लंकेस ने कहा-- रे वानर! तू कौन है? किस के बल पर तूने वन को उजाड़कर नष्ट कर डाला? क्या तूने कभी मुझे (मेरा नाम और यश) कानों से नहीं सुना? रे शठ! मैं तुझे अत्यन्त निःशंक देख रहा हूँ।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद