रिपु उतकरष कहत सठ दोऊ
रिपु उतकरष कहत सठ दोऊ
चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
रिपु उतकरष कहत सठ दोऊ। दूरि न करहु इहाँ हइ कोऊ॥ माल्यवंत गृह गयउ बहोरी। कहइ बिभीषनु पुनि कर जोरी॥ २ ॥
अर्थ
[रावण ने कहा--] ये दोनों मूर्ख शत्रु की महिमा बखान रहे हैं। यहाँ कोई है? इन्हें दूर करो न! तब माल्यवान् तो घर लौट गया और विभीषणजी हाथ जोड़कर फिर कहने लगे--।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
विभीषण की रावण को सलाह