कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद

दोहा २० · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद। सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद॥ २० ॥

अर्थ

हनुमानजी को देखकर रावण दुर्वचन कहता हुआ खूब हँसा। फिर पुत्र-वध का स्मरण किया तो उसके हृदय में विषाद उत्पन्न हो गया।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का दोहा २० है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।

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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना