कपि कें ममता पूँछ पर सबहि

दोहा २४ · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

कपि कें ममता पूँछ पर सबहि कहउँ समुझाइ। तेल बोरि पट बाँधि पुनि पावक देहु लगाइ॥ २४ ॥

अर्थ

मैं सबको समझाकर कहता हूँ कि बंदर की ममता पूँछ पर होती है। अतः तेल में कपड़ा डुबोकर उसे इसकी पूँछ में बाँधकर फिर आग लगा दो।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का दोहा २४ है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।

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हनुमान-रावण संवाद