पूँछहीन बानर तहँ जाइहि

चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

पूँछहीन बानर तहँ जाइहि। तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥ जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई। देखउँ मैं तिन्ह कै प्रभुताई॥ १ ॥

अर्थ

जब बिना पूँछ का यह बंदर वहाँ अपने स्वामी के पास जाएगा, तब यह मूर्ख अपने मालिक को साथ ले आएगा। जिनकी इसने बहुत बड़ाई की है, मैं जरा उनकी प्रभुता तो देखूँ।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।

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हनुमान-रावण संवाद