सुनत बिहसि बोला दसकंधर
सुनत बिहसि बोला दसकंधर
चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर॥ ५ ॥
अर्थ
यह सुनते ही रावण हँसकर बोला--अच्छा, बंदर को अंग-भंग करके भेज दिया जाय।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की सभा में हनुमान का निर्भीक संवाद और सीता-वापसी का उपदेश का वर्णन है।
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हनुमान-रावण संवाद