कपि बंधन सुनि निसिचर धाए
कपि बंधन सुनि निसिचर धाए
चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
कपि बंधन सुनि निसिचर धाए। कौतुक लागि सभाँ सब आए॥ दसमुख सभा दीखि कपि जाई। कहि न जाइ कछु अति प्रभुताई॥ ३ ॥
अर्थ
बंदर का बाँधा जाना सुनकर राक्षस दौड़े और कौतुक के लिये (तमाशा देखने के लिये) सब सभा में आए। हनुमानजी ने जाकर रावण की सभा देखी। उसकी अत्यन्त प्रभुता (ऐश्वर्य) कुछ कही नहीं जाती।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।
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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना