कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना
कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना
छन्द १, दोहा ३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
छन्द पाठ
कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना। चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना॥ गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै। बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै॥ १ ॥
अर्थ
विचित्र मणियों से जड़ा हुआ सोने का परकोटा है, उसके अंदर बहुत-से सुन्दर-सुन्दर घर हैं। चौराहे, हट्ट, सुन्दर मार्ग और गलियाँ हैं; सुन्दर नगर बहुत प्रकार से सजा हुआ है। हाथी, घोड़े, खच्चरों के समूह तथा पैदल और रथों के समूहों को कौन गिन सकता है! अनेक रूपों वाले राक्षसों के दल हैं, उनकी अत्यन्त बलवती सेना का वर्णन नहीं बनता।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का छन्द १, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।
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लंकिनी वध और लंका प्रवेश