अति उतंग जलनिधि चहु पासा
अति उतंग जलनिधि चहु पासा
चौपाई ६, दोहा ३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा॥ ६ ॥
अर्थ
वह अत्यन्त ऊँचा है, उसके चारों ओर समुद्र है। सोने के परकोटे का परम प्रकाश हो रहा है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “लंकिनी वध और लंका प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा स्वर्णमयी लंका दर्शन, लंकिनी को परास्त कर सूक्ष्म रूप से नगर प्रवेश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
लंकिनी वध और लंका प्रवेश