जुगुति बिभीषन सकल सुनाई

चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जुगुति बिभीषन सकल सुनाई। चलेउ पवनसुत बिदा कराई॥ करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ॥ ३ ॥

अर्थ

विभीषणजी ने [माता के दर्शन की] सब युक्तियाँ (उपाय) कह सुनायीं। तब हनुमानजी विदा लेकर चले। फिर वही (पहले का) रूप धरकर वहाँ गये, जहाँ अशोकवन में सीताजी रहती थीं।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-विभीषण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लंका में हनुमानजी और विभीषण की भेंट तथा राम-भक्ति से पूर्ण संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमान-विभीषण संवाद