देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा
देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा
चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा। बैठेहिं बीति जात निसि जामा॥ कृस तनु सीस जटा एक बेनी। जपति हृदयँ रघुपति गुन श्रेनी॥ ४ ॥
अर्थ
सीताजी को देखकर हनुमानजी ने उन्हें मन ही मन प्रणाम किया। उन्हें बैठे-ही-बैठे रात्रि के चारों पहर बीत जाते हैं। शरीर दुबला हो गया है, सिर पर जटाओं की एक वेणी (लट) है। हृदय में श्रीरघुनाथजी के गुण-समूहों का जपती रहती हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना