जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा

चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा। तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा॥ सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती। करहिं सदा सेवक पर प्रीती॥ ३ ॥

अर्थ

जब श्रीरघुवीर ने कृपा की है, तभी तो आपने मुझे हठ करके (अपनी ओर से) दर्शन दिये हैं। [हनुमानजी ने कहा--] हे विभीषणजी! सुनिए, प्रभु की यही रीति है कि वे सेवक पर सदा ही प्रेम किया करते हैं।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-विभीषण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लंका में हनुमानजी और विभीषण की भेंट तथा राम-भक्ति से पूर्ण संवाद का वर्णन है।

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हनुमान-विभीषण संवाद