जौं आवइ मर्कट कटकाई
जौं आवइ मर्कट कटकाई
चौपाई २, दोहा ३७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं आवइ मर्कट कटकाई। जिअहिं बिचारे निसिचर खाई॥ कंपहिं लोकप जाकीं त्रासा। तासु नारि सभीत बड़ि हासा॥ २ ॥
अर्थ
यदि वानरों की सेना आवेगी तो बेचारे राक्षस उसे खाकर अपना जीवननिर्वाह करेंगे। लोकपाल भी जिसके डर से काँपते हैं, उसकी स्त्री डरती हो, यह बड़ी हँसी की बात है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।
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मंदोदरी-रावण संवाद