श्रवन सुनी सठ ता करि बानी
श्रवन सुनी सठ ता करि बानी
चौपाई १, दोहा ३७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
श्रवन सुनी सठ ता करि बानी। बिहसा जगत बिदित अभिमानी॥ सभय सुभाउ नारि कर साचा। मंगल महुँ भय मन अति काचा॥ १ ॥
अर्थ
मूर्ख और जगत्प्रसिद्ध अभिमानी रावण कानों से उसकी वाणी सुनकर खूब हँसा [और बोला--] स्त्रियों का स्वभाव सचमुच ही बहुत डरपोक होता है। मंगल में भी भय करती हो! तुम्हारा मन (हृदय) बहुत ही कच्चा (कमजोर) है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।
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मंदोदरी-रावण संवाद